Ramzan mubarak
1. रमज़ान क्यों मनाया जाता है ?
2. रमज़ान के महीने में रोज़ा (उपवास) क्यों रखा जाता है?
3. रमज़ान 2021 पर जानिए क्या रोज़े रखने से अल्लाह खुश होता है?
4. रमज़ान 2021 Special: हज़रत मुहम्मद जी को कबीर जी सतलोक लेकर गए थे।
5. पवित्र क़ुरान शरीफ का ज्ञान दाता कौन है?
6. रमज़ान 2021: मुहम्मद जी को कुरान का ज्ञान काल ब्रह्म ने दिया।
7. रमजान 2021 पर जाने क्या इस्लाम में मांस के सेवन की अनुमति है?
8. रमज़ान 2021 पर जानें आखिर कौन है अल्लाहु अकबर ?
9. जानिये वर्तमान में कौन है बाखबर संत ?
10. रमज़ान 2021: अल्लाह जन्म मरण में नहीं आता
रमज़ान क्यों मनाया जाता है?
रमज़ान 2021: रमज़ान का अर्थ होता है पवित्र होना, इसलिये मुस्लिम धर्म में रमज़ान के महीने को काफी पवित्र माना जाता है और इस महीने के प्रत्येक दिन प्रत्येक मुसलमान अल्लाह की इबादत करता है और अल्लाह को खुश करने के लिये लोगों के प्रति भी पाक दिल से मदद के लिए तैयार रहता है । रमज़ान के महीने को मुसलमान सबसे पाक महीना मानते हैं क्योंकि इसी महीने में पवित्र कुरान शरीफ का इस धरती पर वजूद कायम हुआ था यानी मुसलमानों के हिसाब से अवतरण हुआ था ।
रमज़ान के महीने में रोज़ा (उपवास) क्यों रखा जाता है?
रमज़ान के दौरान उपवास रखने का मुख्य उद्देश्य खुद को अल्लाह के करीब लाना है। मुसलमान रोज़े को सब्र और संयम का प्रतीक भी मानते हैं और ऐसा मानते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा रोज़े रखकर वह अल्लाह को जल्द खुश कर सकते हैं। रमज़ान के महीने में कई मुसलमान ज़्यादा से ज़्यादा समय मस्जिदों में बिताते हैं और कुरान पढ़ते हैं । नमाज़, दान, आस्था, मक्का में हज यात्रा करने के साथ रमजान के दौरान रोज़ा रखने को भी इस्लाम में पाँचवा स्तंभ माना जाता है ।
रमज़ान 2021 पर जानिए क्या रोज़े रखने से अल्लाह खुश होता है?
रोज़े (उपवास) रखने से अल्लाह खुश नहीं होता। यह सत्य बात है क्योंकि रोजे रखने से अल्लाह को खुश नहीं किया जा सकता। जिस प्रकार एक पिता अपने बच्चे को दिन भर भूखा नहीं देख सकता ठीक उसी प्रकार अल्लाह-हू-अकबर सबका पिता है वह अपने बच्चों को दिन भर भूखा नहीं देख सकता, वह हमारे इस मनमाने आचरण से दुखी होता है। अल्लाह को हम ख़ुश उसकी सच्ची इबादत करके कर सकते हैं। इस सच्ची इबादत की जानकारी प्राप्त करने के लिये कुरान शरीफ के ज्ञान दाता ने इल्म वाले बाख़बर ( पूर्ण गुरु ) की खोज करने के लिये कहा है ( कुरान शरीफ सुरत फुर्कानि 25 आयत 52 से 59) हिन्दू धर्म में इस इल्मवाले बाखबर को तत्वदर्शी संत कहा जाता है ।
हज़रत मुहम्मद जी की जीवनी का आपको यहां थोड़ा सा हाल देते हैं
जीवनी हज़रत मुहम्मद (सल्लाहु अलैहि वसल्लम)
लेखक हैं – मुहम्मद इनायतुल्लाह सुब्हानी,
मूल किताब – मुहम्मदे (अर्बी) से,
अनुवादक – नसीम गाजी फलाही,
प्रकाशक – इस्लामी साहित्य ट्रस्ट प्रकाशन नं. 81 के आदेश से प्रकाशन कार्य किया है।
मर्कजी मक्तबा इस्लामी पब्लिशर्स, डी-307, दावत नगर, अबुल फज्ल इन्कलेव जामिया नगर, नई दिल्ली-1110025
रमज़ान 2021: हजरत मुहम्मद जी जब माता के गर्भ में थे उस समय उनके पिता श्री अब्दुल्लाह जी की मृत्यु हो गई, छः वर्ष के हुए तो माता जी की मृत्यु। आठ वर्ष के हुए तो दादा अब्दुल मुत्तलिब चल बसा। यतीमी का जीवन जीते हुए हजरत मुहम्मद जी की 25 वर्ष की आयु में शादी दो बार पहले विधवा हो चुकी 40 वर्षीय खदीजा से हुई। तीन पुत्र तथा चार पुत्रियाँ संतान रूप में हुई। हजरत मुहम्मद जी को जिबराईल नामक फरिश्ते ने गला घोंट-घोंट कर जबरदस्ती डरा धमका कर कुरान शरीफ (मजीद) का ज्ञान तथा भक्ति विधि (नमाज आदि) बताई जो मुसलमानों के अल्लाह द्वारा बताई गई थी। फिर भी हजरत मुहम्मद जी के आँखों के तारे तीनों पुत्र (कासिम, तय्यब तथा ताहिर) चल बसे।
विचार करें जिस अल्लाह के भेजे रसूल (नबी) के जीवन में कहर ही कहर (महान कष्ट) रहा। तो अन्य अनुयायियों को कुरान शरीफ व मजीद में वर्णित साधना से क्या लाभ हो सकता है? हजरत मुहम्मद 63 वर्ष की आयु में दो दिन असहाय पीड़ा के कारण दर्द से बेहाल होकर मृत्यु को प्राप्त हुए। जिस पिता के सामने तीनों पुत्र मृत्यु को प्राप्त हो जाए, उस पिता को आजीवन सुख नहीं हो सकता। प्रभु की भक्ति इसीलिए करते हैं कि परिवार में सुख रहे तथा कोई पाप कर्म दण्ड भोग्य हो, वह भी टल जाए। मुसलमानों के अल्लाह द्वारा दिया भक्ति ज्ञान अधूरा है। इसीलिए सूरत फुर्कानि 25 आयत 52 से 59 तक में कहा है कि जो गुनाहों को क्षमा करने वाला कबीर नामक अल्लाह है उसकी पूजा विधि किसी तत्वदर्शी (बाखबर) से पूछ देखो। कबीर परमेश्वर ने कहा मैं स्वयं वही कबीर अल्लाह हूँ। मेरे पास पूर्ण मोक्ष दायक, सर्व पाप नाशक भक्ति विधि है।
रमज़ान 2021 Special: हज़रत मुहम्मद जी को कबीर जी सतलोक लेकर गए थे
कबीर परमेश्वर ने हजरत मुहम्मद जी को भी दर्शन दिए थे। कबीर साहेब हज़रत मुहम्मद जी को भी सतलोक लेकर गए, सर्व लोकों की वास्तविक स्थिति से परिचय करवाया। किन्तु हज़रत मुहम्मद जी के अनुयायियों की संख्या उस समय एक लाख अस्सी हज़ार हो चुकी थी। इस कारण वे तत्वज्ञान को नहीं समझ सके एवं मान-बड़ाई के कारण वापस यहीं पृथ्वी लोक में आकर गलत साधना/ काल ब्रह्म वाली साधना करने लगे।
कबीर साहेब ने कहा है-
हम मुहम्मद को वहाँ ले गया । इच्छा रूप वहाँ नहीं रहयो।।
उलट मुहम्मद महल पठाया, गुज बीरज एक कलमा लाया ।।
रोजा, बंग, नमाज दई रे । बिसमिल की नहीं बात कही रे ।।
पवित्र क़ुरान शरीफ का ज्ञान दाता कौन है?
पूरा मुस्लिम समाज ये मानता है कि पवित्र क़ुरान शरीफ का ज्ञान दाता स्वयं अल्लाह (पूर्ण प्रभु) ही है। लेकिन आइए हम उस सच्चाई पर एक नज़र डालें जो अब तक छिपी हुई थी।
पवित्र कुरान शरीफ़ सूरह अल-फुरकान 25 आयत नं. 59
जिसने आसमानों और जमीन और जो कुछ उनके बीच में है (सबको) छः दिन में पैदा किया, फिर तख्त पर जा विराजा (वह अल्लाह बड़ा) रहमान है, तो उसकी खबर किसी बाखबर (इल्म वाले) से पूछ देखो। (59)
भावार्थ : कुरान ज्ञान दाता अल्लाह (प्रभु) किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत कर रहा है जो सर्व ब्रह्मण्डों का रचनहार है, जिसका वास्तविक ज्ञान तो किसी तत्वदर्शी संत(बाखबर) की शरण ग्रहण करने से ही हो सकता है। कुरान ज्ञान दाता स्वयं स्वीकारता है कि उसकी खबर किसी बाखबर (इल्म वाले) से पूछो, मैं नहीं जानता।
सूरह अल-फुरकान 25 आयत नं. 55
और अल्लाह के सिवाय ऐसों को पूजते हैं जो न उनको नफा पहुँचा सकते हैं और न उनको नुकसान पहुँचा सकते हैं। और काफ़िर तो अपने परवरदिगार से पीठ दिए हुए (मुँह मोड़े) हैं।
भावार्थ : कुरान ज्ञान दाता अल्लाह (प्रभु) पैगंबर मुहम्मद को बता रहा है कि ऐसे लोग हैं जो अल्लाह को भगवान नहीं मानते हैं और अन्य देवताओं की पूजा करते हैं, जो उन्हें कोई लाभ नहीं दे सकते हैं, न ही उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। वे भगवान के प्रति अविश्वास रखते हैं और उन्हें काफिर मानना चाहिए क्योंकि वे गलत साधनाएं कर रहे है.
इसका तात्पर्य यह है कि कुरान ज्ञान दाता से अन्य कोई और पूर्ण परमात्मा है, वह सर्व के पूजा करने योग्य है। उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद से कहा कि काफिरों का कहा मत मानना व अल्लाह / प्रभु के लिए संघर्ष (जिहाद) करना, लड़ाई नहीं करना।
रमज़ान 2021: मुहम्मद जी को कुरान का ज्ञान काल ब्रह्म ने दिया
यह जानने के लिए कि आखिर क़ुरान का ज्ञान हज़रत मुहम्मद जी को कैसे मिला हम जानते है उनकी जीवनी।
जीवनी हजरत मुहम्मद (सल्लाहु अलैहि वसल्लम) लेखक हैं – मुहम्मद इनायतुल्लाह सुब्हानी, मूल किताब – मुहम्मदे (अर्बी) से, अनुवादक – नसीम गाजी फलाही, प्रकाशक – इस्लामी साहित्य ट्रस्ट प्रकाशन नं. 81 के आदेश से प्रकाशन कार्य किया है।
मर्कजी मक्तबा इस्लामी पब्लिशर्स, डी-307, दावत नगर, अबुल फज्ल इन्कलेव जामिया नगर, नई दिल्ली। पृष्ठ नं. 67 – 75.
रमज़ान 2021: एक समय प्रभु प्राप्ति की तड़फ में हजरत मुहम्मद जी नगर से बाहर एक गुफा में साधना कर रहे थे। अचानक एक आवाज़ आई। वे बहुत डर गए, आंखें खोली तो सामने एक फरिश्ता खड़ा था। उसने कहा पढ़ो। हजरत मुहम्मद जी ने कहा मुझे पढ़ना नहीं आता। जिबराईल नामक फरिश्ते ने हजरत मुहम्मद जी को डरा धमकाकर, उनका गला घोंट-2 कर बलात कुरान शरीफ का ज्ञान समझाया।
क्या भगवान दर्द दे सकता है और किसी भी आत्मा को डरा सकता है? सपने में भी यह संभव नहीं है। क्योंकि एकमात्र अल्लाह / प्रभु ही है जो हमारा वास्तविक पालनहार है। तथ्य यह है कि खलनायक, जो कि क्षर पुरुष (काल) के अलावा कोई और नहीं है, ने कुरान का ज्ञान उसी तरह से दिया जैसे उसने अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों का ज्ञान प्रदान किया। वह किसी के भी शरीर में सूक्ष्म रूप बना कर प्रवेश कर जाता है और फिर प्रवचन देता है।
इस प्रकार, पूर्ण परमात्मा ने उन्हें कुरान का ज्ञान दिया, यह अवधारणा गलत साबित होती है और वास्तविकता यह है कि काल ही कुरान का ज्ञान दाता है। काल ने ही हजरत मुहम्मद जी को बलपूर्वक यह ज्ञान समझाया।

Nice knowledge
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