Diwali 2021

क्यों और कैसे मानते हैं दिवाली का त्यौहार ? (Diwali 2021)

  
  


Diwali दिवाली को त्योहार के रूप में कार्तिक माह के अमावस्या को मनाया जाता है।

             
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Diwali 2021

कार्तिक अमावश्या 

राम जी अपनी धर्मपत्नी सीता जी को 12 वर्ष रावण के कैद में रहने के बाद छुड़वा कर वापस अयोध्या लौटे थे। रावण ने सीता जी का अपहरण कर लिया था। श्री राम जी ने हनुमान जी द्वारा संधि प्रस्ताव भेज कर सीता जी को लौटने को कहा था परंतु अहंकारी दुष्ट रावण नही माना। तब राम जी ने वानर सेना और मुनीन्द् ऋषि जी के आशीर्वाद से रावण को युद्ध में मारकर तब सीता जी को रावण के कैद से छुड़वाए। सीता जी को अयोध्या वापस लाने से पहले राम जी ने सीता जी का अग्नि परीक्षा ली थी जिसमे सीता को पास हुई थी। 
यह त्रेता युग की बात है राम जी सीता जी की परीक्षा लेकर वापस लौट रहे थे तब उनका 14 वर्ष का वनवास भोग चुके थे अयोध्या में उनके लौटने की खुशी दौड़ उठी अयोध्या के लोगो अब उनका नरेश वापस मिलेंगे। उनके घर लौटने की खुशी में पूरे अयोध्या को दीपो (diwali) से जगमगा दिया गया था।
 

विष्णु जी, राम रूप में श्राप वश जन्मे थे।

राम जी विष्णु जी के अवतार थे। जो नारद जी के श्रापवश पृथ्वी पर अपना कर्म भोगने आए थे। नारद जी के श्रापवश विष्णु जी को त्रेतायुग में एक जीवन स्त्री के वियोग में गुजारना था। जब की द्वापर युग में विष्णु जी के अवतार श्री कृष्ण जी की 16 हजार रानियां थीं।

मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी ने तार तार की मर्यादा।

 राम और सीता जी का जीवन सदा दुखो से भरा रहा। विवाह होते ही राज पाठ छोड़ कर वनवास भोगना पड़ा। जंगलों में जानवरों का भय तो था ही उपर से राक्षस रावण द्वारा सीता जी का अपहरण कर लेना। लक्ष्मण जी भी विवाहित होते हुए भी अपने बड़े भैया राम जी के साथ वनवास भोगना स्वेच्छा से स्वीकार किए थे।
राम और सीता जी को अभी वनवास से अभी 2 बरस लौटे हुए थे की धोबी और उसके पत्नी के घरेलू  झगड़े में धोबी ने अपने पत्नी को यह ताना मारा की " मैं राम जैसा नहीं हूं कि रावण के कैद में 12 वर्ष रहने के बाद भी तुम्हें घर पर रखू।"
धोबी का यह व्यंग राम जी के हृदय का छलनी कर गया और उन्होंने निश्चय किया अब मैं लोगों का व्यंग्य नहीं सुनूंगा और सीता का त्याग कर देंगे।
इस पृथ्वी पर किसी को भी राम जी द्वारा माता सीता जी को घर से निकलने का दुःख नहीं है। श्री राम जी भी क्रोध, अहंकार, मोह, लोभ के जाल से मुक्त नही थे। अगर राम जी मर्यादा पुरुषोत्तम होते तो भरी रात को अपनी पत्नी सीता जी को घर से नही निकलते।
सच तो यह है की राम जी तीन लोग के मालिक है लेकिन इनकी बुद्धि का कंट्रोल (control) इनके पिता काल के हाथो में है। वह जब चाहे तब इनकी बुद्धि on और of कर देता है।
उदाहरण के लिए (For exmapl) राम जी भगवान होते हुए भी यह नही जान पाए की सीता जी कहा चली गई या किसी ने उन्हें उठा तो नही लिया?
सीता जी को रावण के कैद से छुड़वाने के लिए कई करोड़ सैनिक रावण के 1 लाख पुत्र और सवा लाख रिश्तेदार भी मारे गए।

राम जी साधक की इच्छाओं की पूर्ति नही कर सकते है।

राम जी भगवान कहलाते जरुर है लेकिन इनकी शक्तियां बहुत सीमित है यह मरे हुए व्यक्ति तक को जिंदा नही कर सकते है। युद्ध के समय जब लक्ष्मण मूर्छित अवस्था में चले गए तो राम जी बहुत विलाप किया थे तब हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाया और लक्ष्मण जी की प्राणों की रक्षा हुई।
ब्रह्मा जी के पुजारी ब्रह्मा जी के लोक में शिव जी के पुजारी शिव लोक में, विष्णु जी का पुजारी विष्णु लोक में तथा काल का पुजारी ब्रह्मलोक में जाता है। गीता अध्याय 8 श्लोक 16 में अस्पष्ट किया है की ब्रह्म लोक पर्यत्न सब लोको में गए साधक जन्म मरण में रहते है। और वह पुनः लौटकर पृथ्वी लोक पर आते है। गीता अध्याय 15 श्लोक 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 वाली मुक्ति नही मिली जहा जाने के बाद साधक कभी लौट कर जन्म मरण में नही आता है। सनातन परम धाम तथा परम शक्ति उसी को प्राप्त होती है। जिसका जन्म कभी ना हो सदा युवा बना रहे कभी मृत्यु ना हो। सब सूर यानी देवता तथा ऋषि मुनि उपरोक्त प्रभुओ की पूजा करते है। इस लिए उनको मोक्ष प्राप्त नहीं होता।

कबीर, हरी नाम विष्णु का होई। विष्णु विष्णु जपे जो कोई।। जो विष्णु को करता बतलावे। कहो जीव कैसे मुक्ति फल पावै।। बहुत प्रीति से विष्णु धावै। सो जीव विष्णु पूरी में जावै।। विष्णु पूरी में निर्भय नाही। फिर के डार देय भूमाही।। 
जब मरे विष्णु मुरारी। कहा रहेंगे विष्णु पुजारी।। यह फल विष्णु भक्ति का भाई। सतगुरु मिले तो मुक्ति पाई।।

तीनो देवताओं तथा ब्रह्मा साधना का फल

यदि आप विष्णु जी का भक्ति करते हो और उन्हीं को कर्ता मानते हो तो आप विष्णु विष्णु जाप कर के विष्णु जी के लोक में  चले जाओगे अपना पुण्य समाप्त कर के फिर इस गंदे लोग पृथ्वी पर जन्म पाओगे एक दिन अवश्य विष्णु जी की मृत्यु होगी इस लिए विष्णु जी के भक्ती से गीता अध्याय 18 श्लोक 62 तथा अध्याय 15 श्लोक 4 वाली मुक्ति व सनातन स्थान और प्राप्त नहीं होगा।

तो लोग दीवाली क्यों मना रहे है? (Diwali 2021)

कार्तिक अमावस्या की काली रात जो अयोध्या वासियों के लिए एकमात्र खुशी का दिन था जब श्री राम जी माता सीता संघ अयोध्या लौटे। इसे त्यौहार का रूप राम सीता अयोध्या वासियों ने मिलकर दिया। वाली या अन्य कोई भी त्यौहार जो वर्तमान में मनाया जा रहे हैं इनका कोई लेना देना अन्य वेदों, गीता से नहीं है। सत्य कथा अवश्य लेकिन इसे त्यौहार के रूप में मनाने का कोई फायदा नहीं। केवल मनोरंजन मात्र और यादगार के लिए मनाया जा रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि राम जी और सीता जी श्राप के बिना मिलन संभव ही नहीं था।
राम जी सीता जी से मिलना चाहते थे परंतु सीता जी उनका मुख भी देखना नहीं चाहती थी जिस कारण सीता जी धरती के गोद में समा गई अंत में पश्चाताप वश राम जी ने सरयू नदी में जल समाधि ली।

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